भोपाल: राज्य के वन विभाग को 46 साल पहले की गई गलती को अब सुधारना पड़ा है तथा उसने अब रातापानी अभ्यारण्य का वन क्षेत्र बढ़ा दिया है।
दरअसल 16 जुलाई 1976 को जारी अधिसूचना में रातापानी अभ्यारण का क्षेत्रफल 530.67 वर्ग किमी (53066.56 हेक्टेयर) दिया गया था जिसे अब सुधार कर वनक्षेत्र 532.286 वर्ग किमी (53228.6 हेक्टेयर) कर दिया गया है। इसी प्रकार, वन विभाग की 24 जून 1983 को जारी अधिसूचना में रातापानी अभ्यारण्य का रकबा 135.14 वर्ग किमी बताया गया था जिसे अब सुधार कर वनक्षेत्र 135.031 वर्ग किमी (13503.1 हेक्टेयर) एवं क्षेत्रफल 23.65 वर्ग किमी के स्थान पर वनक्षेत्र 155.748 वर्ग किमी (15574.8 हेक्टेयर) कर दिया गया है। नये बदलाव में वन विभाग ने साफ किया है कि इस संशोधन के उपरान्त अभ्यारण्य की सीमाएं यथावत रहेंगी।
ये भी हुये बदलाव:
भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत धारा 4 के अंतर्गत 26 मई 1967 को बैतूल जिले की तहसील भौंरा के वनमंडल शाहपुर के वन परिक्षेत्र उत्तर बैतूल के वनखण्ड मलवार का रकबा 192 एकड़ बताया गया था जिसे अब घटाकर 129 एकड़ कर दिया गया है।
इसी प्रकार, वनखण्ड घोड़ादेव का क्षेत्रफल 539 एकड़ था जिसे बढ़ाकर अब 569 एकड़ कर दिया गया है। वनखण्ड सोनादेह बाना बहेड़ा का पहले क्षेत्रफल 33.19 एकड़ था जिसे बढ़ाकर अब 35.19 एकड़ कर दिया गया है। वनखण्ड जामुन का पहले क्षेत्रफल 993 एकड़ था जिसे घटाकर अब 113 एकड़ कर दिया गया है।
वनखण्ड उत्तर बांचा का पहले क्षेत्रफल 16.12 एकड़ था जिसे बढ़ाकर अब 16.32 एकड़ कर दिया गया है। वनखण्ड मर्दवानी माल का पहले क्षेत्रफल 43.81 एकड़ था जिसे घटाकर अब 34.81 एकड़ कर दिया गया है। वनखण्ड खेड़ला टिकारी का पहले क्षेत्रफल 3454.40 एकड़ था जिसे घटाकर अब 3378 एकड़ कर दिया गया है।
वनखण्ड उडऩदन जामठी का पहले क्षेत्रफल 1278.69 एकड़ था जिसे घटाकर अब 1247.70 एकड़ कर दिया गया है। इन सभी बदलाव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व/वन व्यवस्थापन अधिकारी बैतूल को धारा 5 से 19 की कार्यवाही करने के लिये कहा गया है जिससे वे राजस्व अभिलेखों में सुधार कर सकें।